बहारों को चमन याद आ गया है...

ग़ज़ल - ग़ुलाम अली

बहारों को चमन याद आ गया है,
मुझे वो गुलबदन याद आ गया है।

लचकती शाख ने जब सर उठाया,
किसी का बाकपन याद आ गया है।

तेरी सूरत को जब देखा है मैंने,
उरुजू-ऐ-फिक्र-ओ-फन याद आ गया है।

मिले वो अजनबी बनकर तो रफ़्वयत,
ज़माने का चलन याद आ गया है।

बहारों को चमन याद गया है,
मुझे वो गुलबदन याद गया है