बहारों को चमन याद आ गया है...

ग़ज़ल - ग़ुलाम अली

बहारों को चमन याद आ गया है,
मुझे वो गुलबदन याद आ गया है।

लचकती शाख ने जब सर उठाया,
किसी का बाकपन याद आ गया है।

तेरी सूरत को जब देखा है मैंने,
उरुजू-ऐ-फिक्र-ओ-फन याद आ गया है।

मिले वो अजनबी बनकर तो रफ़्वयत,
ज़माने का चलन याद आ गया है।

बहारों को चमन याद गया है,
मुझे वो गुलबदन याद गया है

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. ब्लोगिंग जगत में स्वागत है ।
    लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    www.rachanabharti.blogspot.com
    कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लि‌ए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है
    www.swapnil98.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं