संस्कृत लिप्यन्तरण : उपकरण रूपरेखा (भाग-२)

संस्कृत लिप्यन्तरण - सार्वभौमिक और स्वचालित (भाग-१) में संस्कृत भाषा के लिए लिप्यन्तरक की आवश्यकता पर मैंने प्रकाश डाला है। अतः इस लिप्यन्तरक की संरचना पर चर्चा करें। यह लिप्यन्तरक कैसा होना चाहिए, कैसे यह किसी लेख को एक भाषा से दूसरे भाषा में लिप्यन्तरित कर सकेगा, कैसे विद्यमान वेबसाइट और नई वेबसाइट सहजता से इसका प्रयोग कर सकेंगे, जैसे कई प्रश्न हैं जिसका उचित हल निकालना आवश्यक है।

लिप्यन्तरक की आधार भाषा
देवनागरी को आधार मानते हुए इस लिप्यन्तरक का निर्माण किया गया है, रोमनी रूप से नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि (१) रोमनी वर्णमाला संस्कृत के सिद्ध उच्चारणों लिए सीमीत है, (२) देवनागरी की वर्णमाला में संस्कृत के लगभग सभी उच्चारण स्वर आ जाते हैं, (३) यूनीकोड में, जिसके माध्यम से विश्व की सभी लिपियों को वेबसाइट पर समान्यतः दर्शाया जाता है, और भारत सरकार की इन्स्कृप्ट ने देवनागरी को आधार मानते हुए ही समस्त भारतीय लिपियों का निर्माण किया गया है और (४) देवनागरी ही संस्कृत का सर्वाधिक प्रयुक्त और प्रचलित रूप है।

यूनीकोड (unicode.org) पर सभी भारतीय भाषाओं को एक समान स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। उदहारण के लिए, कन्नड़ और मलयालम का 'क' और देवनागरी लिपि का 'क' अपने प्रारंभिक वर्ण से एक समान दूरी पर हैं। विभिन्न भारतीय भाषाओं की वर्णमाला की इस समानता और इनके समान यूनीकोड संरचना से लिप्यन्तरण का काम सरल हो जाता है।

लिप्यन्तरक की मूल तकनीक
इसके लिए जावास्कृप्ट का प्रयोग किया जा सकता है। इसके कई फायदे हैं (१) इसे वर्तमान पृष्ठों में आसानी से जोड़ा या हटाया जा सकता है (२) सर्वर के सुरक्षित क्षेत्र से कोई छेड़-छाड़ की संभावना कम हो जाती है और वेबसाइट की सुरक्षा बनी रहती है, और (३)उपकरण में हुए भावी अद्यतन का इससे स्वतः ही सम्मेलन हो जाता है।

क्या पृष्ठ पर सब कुछ लिप्यन्तरित करें?
पृष्ठ के जितने भी संस्कृत में लेख हैं, उनका ही लिप्यन्तरण होना चाहिए। इसमें पन्ने का शीर्षक, किसी भी कड़ी या अन्य एचटीएमएल भाग का शीर्षक और उनमें निहित लेख शामिल हैं।किसी पृष्ठ में मात्र संस्कृत लेख होना भी आवश्यक नहीं। एक श्लोक की व्याख्या के लिए सरल भाषाओं का प्रयोग किया जा सकता है। अतः यह भी आवश्यक है कि मात्र संस्कृत भाषा में लिखे भाग को ही लिप्यन्तरित किया जाये।

लिप्यन्तरक का स्वरूप
लिप्यन्तरण के लिए सभी भारतीय भाषाओं की एक सूची बनाई जा सकती है, जो पृष्ठ के ऊपरी दाएँ कोने या अन्य सहज स्थान पर लगाई जा सकती है। जब एक भाषा का चयन होता है, तो पृष्ठ को भाषा में प्रदर्शित किया जाता है। लिप्यन्तरित पृष्ठ में अगर नई भाषा का चयन किया जाता है, तो उत्तम यही होगा कि पुनः देवनागरी में लिखे लेख को नई भाषा में लिप्यन्तरित किया जाये। इससे लिप्यन्तरण में आई त्रुटियों को कम किया जा सकता है।

एक ही वेबसाइट पर एक पन्ने से दूसरे पन्ने में जाने के लिए निरंतर नई भाषा के चयन की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए। पाठक की वरीयता को एक कूकी में सहेज कर उस वेबसाइट के सभी पन्नों को पाठक की पसंदीदा भाषा में दिखाया जा सकता है।

सरल लिप्यन्तरण
यह उपकरण संस्कृत के देवनागरी रूप को अन्य भाषा में लिप्यन्तरित करता है। किसी भी भाषा से दूसरे भाषा में सिद्धांतः लिप्यन्तरण हो सकता है, परन्तु इससे त्रुटियों के आने की संभावना रहती है। जहाँ देवनागरी को शुद्ध रखने की कोशिश की गई है, अन्य भाषाओं पर क्षेत्रिय प्रभाव अधिक होता है, अतः लिप्यन्तरण में अशुद्धी आ सकती हैं। उदाहरणतः, बंगाली में 'व' का उच्चारण 'ब' की तरह ही किया जाता है, अतः अगर बंगाली संस्कृत को देवनागरी में परिवर्तित करें तो यह जानना कठिन है कि 'ब' को 'ब' ही रहने दें या 'व' में लिप्यन्तरित करें।

पूर्ण लिप्यन्तरण
सिद्धांतः संस्कृत का लिप्यन्तरण किसी भी एक भाषा से दूसरे भाषा में किया जाना चाहिए। इसे सामान्य वर्ण, स्वर और चिन्हों के मेल से ऐसे बनाया जा सकता है जिससे अशुद्धियाँ कम से कम हो। इस कार्य में क्षेत्रिय प्रभावों पर विशेष ध्यान देते हुए उपकरण का निर्माण किया जा सकता है।

इसे अधिक सरल बनाने के लिए देवनागरी को मध्य आधार बनाया जा सकता है। उदहारणतः संस्कृत के कन्नड़ रूप को तेलुगु रूप में लिप्यन्तरित करने के लिए दो बार लिप्यन्तरण का प्रयोग किया जा सकता है, पहले कन्नड़ को देवनागरी और फिर देवनागरी को तेलुगु में लिप्यन्तरित करके। अतः दो स्थानीय भाषा के आपसी लिप्यन्तरण के लिए देवनागरी को आधार बनाया जा सकता है। हालाँकि कुछ भाषाएँ आपस में संबंधित हैं, जैसे बंगाली और अमामी या कन्नड़ और तेलुगु, और उनका आपसी लिप्यन्तरण अधिक सरल होना चाहिए, देवनागरी को आधार बनाने से लिप्यन्तरक का सार्वभौम रूप और शुद्धता दोनों बनी रहती है।

देवनागरी और अन्य भाषा के लिप्यन्तरण अशुद्धियों को ध्यान में रखने से कुल अशुद्धियाँ कम हो जाती हैं। इससे प्रत्येक भाषा के आपसी अशुद्धियों पर ध्यान देने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती।

यहाँ भी देखें, भारतीय भाषा अंतः लिप्यन्तरण : लिप्यन्तरक रूपरेखा

संस्कृत लिप्यन्तरण
सार्वभौमिक और स्वचालित (भाग-१)
उपकरण रूपरेखा (भाग-२)
विकि विशेष (भाग-३)
तकनीकि विवरण (भाग-४)
संस्कृत वेबसाइट एकीकरण (भाग-५)
भारतीय भाषा अंतः लिप्यन्तरण परियोजना (भाग ६)
उपकरण उत्थान संबंधी सुझाव (भाग-७)

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